Breathe Easy- Empowering Lives Beyond Asthma

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दमा दम के साथ नहीं दमदार इलाज से जाता है।
दोस्तों हमारे समाज में सांस की बीमारी अर्थात दमा को दम के साथ जाने वाली बीमारी माना जाता है।
जब तक मनुष्य जीवित रहता है इस बीमारी को ठीक नहीं कर पाता है। 🙏🌷
लेकिन हमारा मानना है अगर रोगी की शारीरिक एवं मानसिक चिकित्सा की जाए तो यह रोग अवश्य ठीक हो जाता है ।🙏🌷
सांस की बीमारी को हमारे चिकित्सा सूत्र में शारीरिक से ज्यादा मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
आमतौर पर सांस के मरीज अपने विचारों को दबा कर रखते हैं ऐसे मरीज आसपास के माहौल में अपने आप को समझ नहीं पाते हैं ।
आसपास के लोगों का दबाव उनको अपने विचार अंदर दबाकर रखने पर मजबूर करता है और यही दबे हुए विचार सांस के मरीज की तकलीफ का मुख्य कारण कारण बनते हैं ।
जब सांस के मरीज को ज्यादा तकलीफ हो तो उसका स्थान परिवर्तन कराने से जहां उसके मन को खुशी मिलती है ऐसी जगह ले जाने से उसकी तकलीफ कम हो जाती है ।
इसमें मरीज को खुश रहना अति आवश्यक है
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आज हम आपको बहुत सारे ऐसे महान विद्वानों के आयुर्वेद आचार्यों के गुप्त नुस्खे आपके सम्मुख रखने जा रहे हैं जिनके प्रयोग से उन्होंने हजारों रोगियों को स्वस्थ जीवन प्रदान किया है ।
अगर आप आयुर्वेदिक डॉक्टर है तो आप इन उसको को बहुत आराम से समझ सकते हैं इनका उपयोग कर सकते हैं।
लेकिन यदि आप एक आम आदमी है तो आप अपने नजदीकी किसी आयुर्वेदाचार्य के सहयोग से इन नुस्खों को प्रयोग में ला सकते हैं।
आज के इस लेख में हम अलग-अलग तरह की ऐसी विधियों को आपके सम्मुख प्रस्तुत करने जा रहे हैं जो आज तक गुप्त रही हैं।

हमें उम्मीद है हमारा यह कार्य एक स्वस्थ समाज के की रचना में अपनी भूमिका अदा करेगा।
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➕भारंगी
➕मुलहटी
➕शुंठी
➕हल्दी
➕वासा पत्र
➕हरितकी
सभी 10-10 ग्राम ले ले
🍀2 ग्राम धतूरा पत्र चूर्ण
इन सभी जड़ी बूटियों को पीस कर चूर्ण बना लें
🌷5 से 10 ग्राम चूर्ण की मात्रा गर्म पानी से मरीज को देनी है
🙏सुबह सूर्य उदय से 2 घंटे पहले अर्थात चार 4:30 बजेदूसरी खुराक 10:00 एवं तीसरी खुराक सायंकाल 6:00 बजे।
यह साधारण सा दिखने वाला नुस्खा सांस के रोगियों के लिए अमृत के समान है

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🍁मदार पुष्प
🍁कटेरी पुष्प
🍁मधुयष्टि
20- 20 ग्राम
🍁छोटी पीपली 10 ग्राम
सभी औषधियों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर गोली बना दें मटर के दाने के समान।
सांस के रोगी को तकलीफ ज्यादा होने पर एक से दो गोली चूसने के बाद गर्म पानी पिलाएं तुरंत सांस की तकलीफ में आराम आता है।

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🍃अपामार्ग 1 किलो
🍃वासा के पत्ते 1 किलो
🍃केले के नर्म पत्ते 1 किलो
🍃देसी गुड 2 किलो
🍃जंगली बेर की जड़ 1 किलो
गुड को 8 किलो पानी में भिगोकर अन्य औषधियों को कूटकर मिट्टी के बर्तन में डाल दें एक-दो दिन के बाद इसमें
🍃यवक्षार 50 ग्राम
🍃सज्जी क्षार 100 ग्राम
🍃नौसादर 20 ग्राम
डालकर रख दें।
सब को 15 दिन तक मुंह ढककर बंद कर कर रखें 15 दिन के बाद निकाल कर मोटे कपड़े से छानकर शीशे की बोतलों में भरकर रख ले।
👉2 से 4 चम्मच गरम पानी के साथ दिन में तीन समय देने से सांस के रोगी को कुछ ही दिनों में पूर्ण आराम प्रदान करता है।

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200 ग्राम फिटकरी को चूर्ण कर लोहे की कड़ाही में डालें फिर उसमें धतूरे का स्वरस डालकर पकाएं , 2 किलो धतूरा स्वरस फिटकरी में डालकर भस्म बनाएं जब भस्म कृष्ण वर्ण की हो जाए तो इसको उतार कर खरल में 6 से 8 घंटे मर्दन करें।
👉🙏1 से 4 रत्ती
मधु एक चम्मच
वासावलेह एक चम्मच
के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने के लिए।
तमक श्वास की अवस्था में तुरंत लाभकारी है।

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🌎खसखस के दाने 500 ग्राम
🌎पोस्त डोडा 80 ग्राम
दोनों को मिलाकर रात के समय 1 किलो पानी में भिगोकर रख दें 24 घंटे के बाद सबको पीसकर उस घर को छानकर उस का रस निकालने फिर इस रस को कढ़ाई में डालकर हल्की आंच पर गर्म करें थोड़ा गाढ़ा होने पर।
🌎800 ग्राम मिश्री मिला दें और हल्की आंच पर पकाते रहें।जब चाटने योग्य हो जाए तो 80 ग्राम मुलेठी मिला दें।
🌎3 से 5 ग्राम प्रातः एवं शाम को शहद के साथ देने से दमे के रोगी को तुरंत आराम आता है।

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❄जायपत्री, बादाम ,जायफल , लौंग, पिस्ता ,काले तिल, अकरकरा ,अजवाइन, सफेद चंदन चूरा, बड़ी इलायची, कोडिया लोहवान , नीम की गिरी, चिरौंजी ,बहेड़ा ,मालकांगनी, कंजा की गिरी
सभी को समान मात्रा में लेकर बालों का यंत्र विधि से तेल निकालें।
❄पान में दो से तीन बूंद डालकर सेवन करें सांस के रोगी में यह उपाय तुरंत आराम करता है कुछ दिन के प्रयोग से ही आराम मिलता है ।

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💧अडूसे का रस कटेरी का रस भांगरे का रस तीनों 500-500 ग्राम लेकर उसमें 300 ग्राम मिश्री 50 ग्राम देसी गाय का घी एवं 100 ग्राम पीपल मिला लें
इन सभी चीजों को हल्की आंच पर गर्म करें जब वह अवलेह बन जाए तब उसमें
💧मुलेठी , सुहागा , वंशलोचन , अनार के छिलके , बहेड़ा सभी 200 200 ग्राम, काकड़ सिंगी 50 ग्राम , कायफल , अकरकरा , तालीसपत्र 100-100 ग्राम, अदरक का रस प्रोग्राम मिलाकर जब पूर्ण अवलेह तैयार हो जाए तो उसको उतार कर ठंडा करने फिर उसमें 300 ग्राम शहद मिला दे और कांच के बर्तन में ढक कर रख दें।
💧3 से 8 ग्राम प्रातः रात को गर्म पानी से खाने के बाद सेवन कराएं अत्यंत लाभकारी प्रयोग है।

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🎇महायोगराज गुग्गुल की 4 से आठ रत्ती की मात्रा धूम्रपान विधि से पान करने पर सांस का दौरा तत्काल रुक जाता है आवश्यकता होने पर 1 से 2 घंटे के बाद पुनः प्रयोग कर सकते हैं काफी लाभकारी है।

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💱अदरक का रस
💱प्याज का रस
💱लहसुन का रस
💱एलोवेरा का रस
💱पान का रस
💱शुद्ध शहद
सभी 200 ग्राम लेकर मिला लें कांच की किसी बर्तन में रखकर एयरटाइट बंद कर मिलाकर रख दें
इस कांच के बर्तन को जमीन में 1 फुट गहरा 15 दिन के लिए दवा दें।
💱15 दिन के बाद तीन से चार चम्मच समान मात्रा में पानी के साथ रोगी को दिन में तीन बार दें।
पहले दिन से ही रोगी की सांस की बीमारी ठीक होने लगती है।
यह काफी उपयोगी दवाई है

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🌜पूर्णिमा की रात को खीर द्वारा चिकित्सा
आयुर्वेद का यह काफी मशहूर एवं प्रसिद्ध चिकित्सा कर्म है।
🌜लाल फिटकरी 50 ग्राम
🌜सेंधा नमक 50 ग्राम दोनों को मिलाकर पीस लें एक मिट्टी की हांडी में यह दवाई डालकर उसमें डेढ़ किलो आक के पेड़ का दूध डालकर मटके को बंद कर उसे उपलों की आंच में गज फुट दें अग्नि धीरे-धीरे जब शांत हो जाए तो मटके को निकाल लें।
फिर मटके में से दवाई निकालकर खरल में मर्दन करें।

🌜पूर्णिमा के दिन रोटी को सारा दिन हलका सुपाच्य भोजन करना चाहिए।
हो सके तो व्रत के नियम का पालन करें।
🌜शाम को 50 ग्राम चावल 1 किलो गाय के दूध में डालकर खीर बनाएं।
🌜खीर तैयार होने पर उसमें डेढ़ ग्राम 12 प्रहरी पीपल मिला ले।
🌜फिर इस खीर में ढाई सौ एमजी उपरोक्त दवाई मिला दे
रोगी को बोलें की भरपेट खीर खाए और फिर जितना टहल सके उतना घूमकर आए।
🌜अगले 3 महीने तक प्रत्येक पूर्णिमा को यह दवाई खाने से प्रभु की कृपा से रोगी को आराम आता है।
🌜3 महीने तक खट्टी तली और बाय बादी वाली चीजें नहीं खानी चाहिए।
हमारा मानना है कि सांस का रोग मन से काफी जुड़ा हुआ है और चंद्रमा मन का प्रतीक है उपरोक्त दवाइयों के साथ-साथ चंद्रमा की चांदनी में किया गया यह प्रयोग शरीर के साथ-साथ मन पर भी असर करता है और काफी सुखदाई परिणाम मिलते हैं।

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🌿पिपरमेंट
🌿सत अजवाइन
🌿वासा क्षार
🌿कर्पूर
सभी 50-50 ग्राम लेकर
🌿200 ग्राम शहद
में मिलाकर एक शीशी में बंद कर कर रख दें।
उपरोक्त मिश्रण एक साधे पान के अंदर शलाका से लगाकर सेवन करने से स्वास का वेग तुरंत थम जाता है।
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🌴फाल्गुन एवं आषाढ़ की पूर्णिमा को खाई जाने वाली दवाई।
🌴अपामार्ग की जड़ 20 ग्राम
🌴काली मिर्च 5
🌴काला जीरा 5
उपरोक्त तीनों चीजों को पीसकर रख ली यह एक मात्रा है इस औषधि को साल में सिर्फ दो बार सेवन किया जा सकता है।
🌴यदि आप पूर्ण विश्वास के साथ इस औषधि का सेवन करते हैं अवश्य आपको आराम मिलेगा।
यदि किसी कारणवश पहली बार आराम ना मिले तो दूसरी बार दवाई अवश्य ले।
फाल्गुन सुदी पूर्णिमा या आषाढ़ सुदी पूर्णिमा की रात्रि को 12:00 इस दवाई का सेवन करना होता है।
🌴शाम को ही जितनी खीर रोगी खा सकें उतनी गाय के दूध में खीर प्यार करले हो सके तो मिट्टी के बर्तन या चांदी के बर्तन में तैयार करें।
🌴इस खीर को 4 से 5 घंटे चंद्रमा की चांदनी में रख दे।
हो सके तो पूरे दिन आप हल्का सुपाच्य भोजन रखा है।
फिर रात्रि को अपने इष्ट का ध्यान कर इस खीर मैं उपरोक्त दवा डालकर उसका सेवन करें।
🌴पहले आप 3 से 5 चम्मच में उपरोक्त दवा मिलाकर खाले उसके बाद बाकी बची खीर का सेवन करें।
खीर खाने के समय प्रभु से प्रार्थना करें कि यह कि मुझे आरोग्य प्रदान करेगी।
🌴अगले 6 महीने तक ठंडी- तली चीजों का परहेज रखें।

“भगवान धन्वंतरि हम सब को सपरिवार स्वस्थ सुखी और समृद्ध रखें यही प्रार्थना”🙏

ज्यादा जानकारी के लिए सम्पर्क करें:-
7015614500
Nadi Vaidya Pharmacy, Karnal

नाड़ी वैद्य डॉ.अजीत सिंह यादव
आयुर्वेदाचार्य
आहार – विहार – नाड़ी परीक्षा विशेषज्ञ
मेडिकल एस्ट्रोलोजर

नाड़ी वैद्य डॉ. मोहित वशिष्ठ
CEO Nadi Vaidya Pharmacy

नाड़ी वैद्य डॉ. सलोनी यादव
CEO Nadi Vaidya Gurukul

नाड़ी वैद्य डॉ. माना यादव
President, HEAL INDIA

Nadi Vaidya Dr. Ajit Singh Yadav
Ayurvedacharya
Diet-Lifestyle and Pulse Diagnosis Expert

Nadi Vaidya Dr. Mohit Vashist
CEO Nadi Vaidya Pharmacy

Nadi Vaidya Dr. Saloni Yadav
CEO Nadi Vaidya Gurukul

Nadi Vaidya Dr. Mana Yadav
President, HEAL INDIA

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